Sunday, November 17, 2019

आत्महत्या करनेसे खुदको कैसे रोके ❔

आत्महत्या करना सिर्फ एक पाप नही बल्की ये एक अपराध भी है। पहली बात तो आत्महत्या करने की कोशीश कर रहा मनुष्य आत्महत्या करने के नुकसानों के बारे में नही सोचता और अगर सोचता भी है तो वो अपनी व्यथा और परिशानीयोंकी वजह से ठिकसे फैसले नही कर पाता इसका कारण है उस मनुष्य का निराशा , दु:ख या क्रोध से अंध होना।                    आत्महत्या करनेसे खुदको रोकने के लिए सबसे पहले तो आप ये समझीये कि, आपका सबसे बडा दूश्मन (शैतान) आपसे ये सब करवाना चाहता है। और आप ये भी जान लिजीए कि, शैतान धूर्त और धोखेबाज है। वो आपको अपनी सारी व्यथाओंसे मुक्त करने का दावा करेगा पर वो कभीभी आपका भला नही चाहेगा। आत्महत्या करनेसे पहले आत्महत्या करने के बाद आपको इस दुनीया से तो मुक्ती मील जाएगी पर मनशांती कभी नही मिलेगी ये जान ले। आत्महत्माका प्रतिफल नरकमेंही मीलता है और वोभी वेदनाओंके रुप में। जहा अच्छे कर्म , सदाचरण , क्षमा, विश्वास और प्रार्थना का प्रतिफल स्वर्ग के साथ साथ इस धरती पर भी मिलता है। आत्महत्या करनेसे पहले सिर्फ एक बार उन व्यंग और अपंग बच्चों को और लोगों को देखे जीनके पास हमारे खयाल से सुख का कोई कारण नही है तबभी वे जी रहे है क्योंकी उन्हे पता है कि वे जैसेभी है उन्हे ईश्वरनेही बनाया है अत: ईश्वरही उन्हे इस दुनीया से मुक्ती देंगे किसीको अपनी या दुसरोंकी जान लेने का कोई अधिकार नही। आत्महत्या करने से पहले कुछ समय प्रार्थना करे और ईश्वरने आजतक आपको क्या क्या दान दिए है और ईश्वर आपसे क्या चाहते है इसपर जरा चींतन करे। मन में आनेवाले आत्महत्याजैसे बुरे विचार रुक जाऐंगे।



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